( चंडीगढ़ साहित्य अकादमी द्वारा प्रकाशित मेरे काव्य संग्रह ' मैं अनजान हूं....' से एक कविता 'इतिहास बन जाएगा ' ) हम खुली सडक़ का लुत्फ उठा मजे से ताजी हवा का आनंद लेते हुए अपनी कार को ड्राईव करते जा रहे थे कि अचानक एक ट्रक पास से गुजरा पीछे लिखा था पास आएगा तो... ... इतना ही पढ़ पाए थे ट्रक आगे निकल गया वह पंक्तियां जो पढ़े बिना अधूरी रह गई थीं रोमेंटिक लगते हुए दिल को गुदगुदा रही थी सोचा कि इन्हें नोट कर लिया जाए घर जाकर श्रीमति को सुनाया जाए उन पर अपने शायराना अंदाज का रुबाब जमा कुछ दाद ही पाई जाए यह सोच हमने एक्सीलेटर पर पांव जमा दिया दूर जा रहे ट्रक को छूने का मकसद बना लिया कार फिर हवा से बातें करने लगी निगाहें उस ट्रक को तलाशने लगीं अचानक निगाह पड़ी एक ढाबे पर किनारे पर खड़ा हुआ था वही ट्रक हमने भी कार वहां ले जा रोक दी अंतिम लाइनों पर जो पड़ी नजर पढ़ कर हम तो यारो सहम गए उन रोमेंटिक लाइनों से बिदक गए ट्रक के पीछे लिखा था मेरे दोस्तो पास आएगा तो इतिहास बन जाएगा
( चंडीगढ़ साहित्य अकादमी द्वारा सर्वश्रेष्ठ लघु कहानी संग्रह के रूप में सम्मानित ' वो अजनबी ' से एक और कहानी ' गुलाबी लिफाफे ' ) छोटे से गांव से शहर में पढऩे आया कबीर बड़े शहर की चकाचौंध में खुद को बेहद अकेला पा रहा था, कोई दोस्त नहीं, कोई साथी नहीं, ऐसे में उसका मन करता कि वह सब कुछ छोड़ कर अपने घर वापिस लौट जाए अपने मां और बापू के पास..., फिर ख्याल आता कि यहां वह कुछ बनने आया है और खुद को गुम कर लेता अपनी ही किताबों में। कॉलेज के हॉस्टल में कमरा न मिल पाने के कारण वह शहर में ही अपनी ही क्लास के दो स्टूडैंटस रमेश और पवन के साथ एक कमरा शेयर कर रहा था। धीरे-धीरे तीनों अच्छे दोस्त बन गए। फिर एक दिन कबीर की क्लास में आई एक नई स्टूडैंट सुगंधा, जिससे उस को पहली ही नजर में प्यार हो गया। सुगंधा जितनी खूबसूरत थी, उतनी ही पढ़ाई में भी होशियार थी, परंतु वह बेहद रिजर्व रहती थी तथा किसी से बात नहीं करती थी। उससे मुलाकातों को बढ़ाने के ख्याल से एक दिन कबीर ने उससे कहा कि गांव से आए होने के कारण उसे पढ़ाई में काफी कुछ समझ नहीं आता है, जिससे कि उसे मुश्किल होती है। उसने सुगंधा से पूछा...