( चंडीगढ़ साहित्य अकादमी द्वारा प्रकाशित मेरे काव्य संग्रह ' मैं अनजान हूं....' से एक कविता 'इतिहास बन जाएगा ' ) हम खुली सडक़ का लुत्फ उठा मजे से ताजी हवा का आनंद लेते हुए अपनी कार को ड्राईव करते जा रहे थे कि अचानक एक ट्रक पास से गुजरा पीछे लिखा था पास आएगा तो... ... इतना ही पढ़ पाए थे ट्रक आगे निकल गया वह पंक्तियां जो पढ़े बिना अधूरी रह गई थीं रोमेंटिक लगते हुए दिल को गुदगुदा रही थी सोचा कि इन्हें नोट कर लिया जाए घर जाकर श्रीमति को सुनाया जाए उन पर अपने शायराना अंदाज का रुबाब जमा कुछ दाद ही पाई जाए यह सोच हमने एक्सीलेटर पर पांव जमा दिया दूर जा रहे ट्रक को छूने का मकसद बना लिया कार फिर हवा से बातें करने लगी निगाहें उस ट्रक को तलाशने लगीं अचानक निगाह पड़ी एक ढाबे पर किनारे पर खड़ा हुआ था वही ट्रक हमने भी कार वहां ले जा रोक दी अंतिम लाइनों पर जो पड़ी नजर पढ़ कर हम तो यारो सहम गए उन रोमेंटिक लाइनों से बिदक गए ट्रक के पीछे लिखा था मेरे दोस्तो पास आएगा तो इतिहास बन जाएगा
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