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Showing posts from October, 2018

इस उम्र में… … हेमा शर्मा

( इस   उम्र   में   मेरी यह कहानी साल 2017 में मेरे कहानी संग्रह वो अजनबी में प्रकाशित हुई थी, जिसे चंडीगढ़ साहित्य अकादमी द्वारा श्रेष्ठ लघु कहानी संग्रह का अवार्ड में मिला था।   ) इस   उम्र   में… … रमन शर्मा ने देखा कि उनकी पत्नी मनोरमा डाइनिंग टेबल पर आचार के चटखारे ले रही है, तो उन्होंने सोचा कि शायद उसे एसीडिटी होगी, यह सोचते हुए वह अपनी टॉय शॉप पर चले गए, दो दिन बाद देखा कि पूरे घर का आलम ही बदला हुआ है, पत्नी खुशी से चहक रही है और पकवानों की खुशबू से पूरा घर महक रहा था। पत्नी ने कान में धीरे से जो कहा, उसे सुन कर तो शर्मा जी को भी चक्कर आ गए, क्योंकि अभी बेटी की शादी को दो महीने ही हुए थे। बात ही कुछ ऐसी थी, क्योंकि जब पत्नी शर्माते हुए पति के कान में यह खबर सुनाती है कि आप बाप बनने वाले हैं, तो हर पति का चेहरा खुशी से खिल उठता है और उसका जी चाहता है कि वह जमाने भर को यह खुशखबरी सुना दे, परंतु 52 वर्ष की उम्र में जब कोई एक शादीशुदा बेटी के बाप को तो यह खबर सुनाए, तो उसे यह समझ में ही नहीं आता कि वह कहांं जा कर स्वयं को दुनिया की नजर ...

मेरी हस्ती निखर जाती है - हेमा शर्मा

जब भी तेरी हर शह मुस्कराती है ए खुदा मेरी हस्ती निखर जाती है देख के गुलों को ये संवर जाती है जिंदगी के फिर नग्मे नए गाती है फिजां भी साज नए छेड़ जाती है खुद पे हेमा जाने क्यों इतराती है हेमा शर्मा