( चंडीगढ़ साहित्य अकादमी द्वारा सर्वश्रेष्ठ लघु कहानी संग्रह के रूप में सम्मानित ' वो अजनबी ' से एक और कहानी ' गुलाबी लिफाफे ' )
छोटे से गांव से शहर में पढऩे आया कबीर बड़े शहर की चकाचौंध में खुद को बेहद अकेला पा रहा था, कोई दोस्त नहीं, कोई साथी नहीं, ऐसे में उसका मन करता कि वह सब कुछ छोड़ कर अपने घर वापिस लौट जाए अपने मां और बापू के पास..., फिर ख्याल आता कि यहां वह कुछ बनने आया है और खुद को गुम कर लेता अपनी ही किताबों में। कॉलेज के हॉस्टल में कमरा न मिल पाने के कारण वह शहर में ही अपनी ही क्लास के दो स्टूडैंटस रमेश और पवन के साथ एक कमरा शेयर कर रहा था। धीरे-धीरे तीनों अच्छे दोस्त बन गए।
फिर एक दिन कबीर की क्लास में आई एक नई स्टूडैंट सुगंधा, जिससे उस को पहली ही नजर में प्यार हो गया। सुगंधा जितनी खूबसूरत थी, उतनी ही पढ़ाई में भी होशियार थी, परंतु वह बेहद रिजर्व रहती थी तथा किसी से बात नहीं करती थी। उससे मुलाकातों को बढ़ाने के ख्याल से एक दिन कबीर ने उससे कहा कि गांव से आए होने के कारण उसे पढ़ाई में काफी कुछ समझ नहीं आता है, जिससे कि उसे मुश्किल होती है। उसने सुगंधा से पूछा कि क्या वह उसके साथ अपने नोट्स एक्सचेंज कर सकती है, जिससे कि उसे हैल्प हो सके।
सुगंधा ने मुस्करा कर उसे उस दिन के नोट्स दे दिए, इस शर्त पर कि वह अगले दिन वापिस कर दिया करेगा। ऐसा नहीं कि सुगंधा कबीर को पसंद नहीं करती थी, सीधा-सादा सा कबीर उसे अपने सपनों का राजकुमार ही नजर आता था, परंतु वह उन लड़कियों में से नहीं थी खुले आम अपने प्यार का इजहार कर पाती।
दोनों की निगाहें प्यार का हाल ब्यां कर रही थीं कि आग बराबर लगी हुई है, परंतु जुबान खामोश ही थी कि पहल कौन करे, यह समझ नहीं आ रहा था। कागज पर लिखे नोट्स का आदान-प्रदान होता रहा और धीरे-धीरे सुगंधा उन नोट्स को बंद गुलाबी लिफाफों में डाल कर कबीर को देने लगी और कहा कि ये सब उसके लिए हैं, इन्हें वापिस करने की जरूरत नहीं है। संगीत के सब्जैक्ट में कबीर बहुत अच्छा था, सो सुगंधा भी उससे संगीत के नोट्स मांग लेती थी, ताकि वह इस विषय पर अपनी पकड़ अच्छी तरह से बना पाए।
रमेश और पवन जानते थे कि कबीर सुगंधा को कितना प्यार करता है तथा दोनों ही चाहते थे कि उसकी लव स्टोरी एक तरफा न रह जाए।
' यार कबीर..., तुम्हें बिना देर किए अपने प्यार का इजहार कर देना चाहिए, क्योंकि शहर में वक्त और लडक़ी का कोई भरोसा नहीं..., कब किसी दूसरे पर मेहरबान हो जाएं...,' रमेश ने कहा।
' नहीं यार..., सुगंधा ऐसी नहीं है..., ' कबीर ने कहा।
' वह तो तब की बात है..., यदि उसे पता हो कि तुम उसे प्यार करते हो..., यदि उसे पता ही नहीं तो कल को किसी ने प्रपोज किया तो हो सकता है न वह उसे हां कर दे..., ' पवन ने कहा।
' कह तो तुम सही रहे हो..., मैं कल ही उस से अपने प्यार का इजहार कर दूंगा...।'
परंतु रमेश और पवन दोनों ही जानते थे कि वह कल कभी नहीं आने वाला, क्योंकि सुगंधा के सामने तो क्या कबीर तो किसी भी लडक़ी के सामने कुछ नहीं बोल पाता और एक दिन सुगंधा किसी और की हो जाएगी।
धीरे-धीरे सुगंधा को भी लगने लगा था कि कबीर को उससे प्यार ही नहीं है, केवल वही उससे प्यार करती है। यदि कबीर को उससे प्यार होता कभी तो कुछ कहता, यहां तक कि कभी नोट्स में ही अपने दिल का हाल लिख देता, परंतु मन का चाहा हमेशा पूरा कहां होता है। नोट्स यूं ही दोनों के हाथों में बदलते रहे।
यूथ फैस्टीवल में जब दोनों का नाम ड्यूट सोंग के लिए सिलैक्ट हुआ तो लगा कि अब दोनों की नजदीकियां शब्दों में जरूर बदलेंगी। कोई एक तो जरूर अपनी हद को तोड़ कर प्यार का इजहार करेगा। कबीर उसे खोने के डर से कुछ कह नहीं पाया और सुगंधा को लगता था शब्दों में उसकी पहल ही कहीं कबीर को उससे दूर न कर दे। बेस्ट ड्यूट सिंगर का खिताब ले कर भी दोनों नदी के दो किनारों की तरह अलग-अलग ही थे।
एक दिन सुगंधा को मां का फोन आया कि उसे लडक़े वाले देखने आ रहे थे, सो वह तीन-चार दिन की छुट्टी ले कर घर चली आए। कबीर से बात करने का उसे मौका ही नहीं मिला और वह घर चली गई। बाद में कबीर को सुगंधा की सहेली प्रेमा से पता चला कि उसका रिश्ता होने वाला है, सो वह घर गई है, कल आ जाएगी।
सुगंधा वापिस आई तो प्रेमा ने बताया कि कबीर ने आत्महत्या कर ली है...।
सुगंधा जो कि रिश्ते के लिए अपने घर वालों को साफ शब्दों में इंकार कर आई थी तथा यह सोच कर आई थी कि इस बार वह कबीर से अपने सवालों के जवाब ले कर ही रहेगी। यदि कबीर अब भी कुछ न कह पाया तो वह शब्दों की दीवार तोड़ कर उसे खुद ही आई लव यू कह देगी..., फिर जो होगा वह देखा जाएगा। कहीं ऐसा तो नहीं कि कबीर किसी और से प्यार करता था..., आखिर क्या हुआ कि उसने आत्म हत्या जैसा कदम उठा लिया। अपनी ही सोचों में गुम वह कबीर के कमरे में उसके अंतिम दर्शन करने पहुंची।
पुलिस वहां पहुंच चुकी थी और रमेश उस समय उन्हें बता रहा था कि वह किसी युवती को एकतरफा प्यार करता था तथा उसकी शादी की खबर से वह कल से काफी अपसेट था। कबीर की लाश देख कर सुगंधा की आंखों से आंसू निकल पड़े और उसके होंठों से एक चित्कार निकली, जब उसकी निगाह कबीर के स्टडी टेबल तक पहुंची, जहां सुगंधा के दिए नोट्स वाले गुलाबी लिफाफे बिना खुले ही पड़े थे, जिनमें सुगंधा के प्रेम पत्र बिना पढ़े ही रह गए, जो उसने कबीर को हर बार लिखे थे। वह कबीर की लाश के पास बैठ कर बस इतना ही बोली... काश तुमने इन्हें कभी खोला तो होता...।

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