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मेरी हस्ती निखर जाती है - हेमा शर्मा


जब भी तेरी हर शह मुस्कराती है
ए खुदा मेरी हस्ती निखर जाती है
देख के गुलों को ये संवर जाती है
जिंदगी के फिर नग्मे नए गाती है
फिजां भी साज नए छेड़ जाती है
खुद पे हेमा जाने क्यों इतराती है
हेमा शर्मा

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